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भारत ने दिखाया है कि संकल्प से सिद्धि और सामर्थय से सफलता कैसे रची जाती है ___कलेक्‍टर ने दी जिलेवासियों को 🇨🇮स्वतंत्रता_दिवस की शुभकामनाऐं.🇨🇮

नर्मदापुरम//मनीष जायसवाल

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आजादी का अमृत महोत्सव पूर्ण हो रहा है। हम आज 78वां आजादी का महोत्सव मनाने जा रहे हैं। हमारा देश एक नई चेतना और एक नई ऊर्जा के साथ संपूर्ण विश्व को यह संदेश दे रहा है कि यह सदी भारत की सदी है। एक युवा राष्ट्र के सामने सदैव चुनौतियां होती हैं लेकिन भारत ने दिखाया है कि संकल्प से सिद्धि और सामर्थय से सफलता कैसे रची जाती है। आजादी और अनुशासन का संतुलन सदैव राष्ट्र को शिखर सौंपता आया है। भारतीय जनमानस की चेतना में स्वतंत्रता के प्रति जो श्रद्धा है वही श्रद्धा यदि कर्तव्यबोध के साथ भी जुड़ती है तो हमारी उड़ान और हमारा आकाश दोनों विश्व विजयी होंगे। भारत अपने सामर्थय को सदैव पहले उन्हें समर्पित करता आया है जो पंक्ति के अंतिम सिरे पर हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा भी भारत की इस चेतना को मूल मंत्र की तरह धारण करती है और वह आचरण साधती है जो जानता है कि सर्व का विकास और सर्व का सामर्थय ही इस स्वतंत्रता का अमृत पर्व है।

प्रशासनिक क्षेत्र में भी हमारा देश नव आचरण का समावेशी मंत्र लेकर एक ऐसा वातावरण तैयार कर रहा है जो न केवल देश बल्कि पूरे विश्व के लिए एक नया आदर्श रच सके। अब जब भिन्न-भिन्न क्षेत्र सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं तब प्रशासनिक सहयोग भी उनके साथ न केवल कदम से कदम मिलाकर चल रहा है बल्कि उनकी प्रगति का पथ भी प्रशस्त कर रहा है।

एक आईएएस अधिकारी के रूप में भारत के हृदय प्रदेश के उस अंचल में अपनी सेवाओं को समर्पित करना जो प्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा का अपना बहुत दुलार से पाला हुआ क्षेत्र है यह अवसर देता है कि प्रकृति और विकास के संतुलन की भारतीय अवधारणा का आदर्श, मूर्तरूप में स्थापित करने में कोई भी कमी न रहने दी जाए। पुण्य सलिला नर्मदा जी के तट पर बसे हुए नर्मदापुरम जिला मुख्यालय में जहां श्रद्धा के अनेक दृश्य मन मोह लेते हैं वहीं बारिश के साथ-साथ एक बड़ी चुनौती भी आती है। बरगी और तवा बांध के गेट खुलते हैं तो जल प्रवाह की तीव्रता बाढ़ की आशंकों को एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने रखती है। लेकिन प्रशासन का आपसी समन्वयन, सक्रियता और सजगता इस चुनौती को स्वीकार करते हैं तो एक विभीषिका केवल तट स्पर्श करके बिना कोई बड़ी क्षति पहुंचाए बीत जाती है।

नर्मदापुरम प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन की अपार संभावनाओं वाला जिला है। साथ ही साथ यहां अनेक उत्सव और मेले इसके सांस्कृतिक जुड़ाव को तो मुखर करते हैं लेकिन ये प्रशासन के लिए भी परीक्षा की घड़ी होते हैं। नागद्वारी का मेला पचमढ़ी के कठिन पर्वतीय क्षेत्र में लगता है जहां लाखों श्रद्धालु आते हैं। कठिन प्राकृतिक क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है लेकिन मैंने यह देखा कि सजगता सक्रियता समन्वयन के सूत्र में सहयोग भाव भी जुड़ जाए तो श्रद्धा का पर्व, उत्सव और मेले में जुटी भीड़ भी अनियंत्रित नहीं होती। नर्मदा जयंती और बांद्राभान के उत्सव ठीक नदी तट पर आयोजित होते हैं, इनमें भी लाखों श्रद्धालु जुटते हैं। हमने पाया है कि प्रशासनिक अधिकारी यदि श्रद्धालुओं के प्रति सहयोग भाव साध लें तो सफलता स्वयं सिद्ध हो जाती है क्योंकि श्रद्धालु प्रशासन के सहयोग देने पर स्वयं अनुशासन साधने लगते हैं।

नर्मदापुरम में जहां एक ओर प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहना होता है वहीं यह क्षेत्र साहित्य खेल और कला से भी गहरा जुड़ाव रखता है। इसलिए संवेदनशीलता को बौद्धिक वर्ग के प्रति भी उदार बनाए रखना होता है और उस स्थिति में भी उदारता को कम नहीं होने देते हैं जब आलोचना का स्वर मुखर हो। पंडित माखनलाल चतुर्वेदी, भवानी प्रसाद मिश्र जी और हरि शंकर परसाई जी जैसे महान साहित्यकारों की जन्म भूमि होने के साथ-साथ इस जिले का शैक्षिक और बौद्धिक स्तर भी इसे सदैव अग्रणीय रखता है। खेल के क्षेत्र में भी हाल ही में ओलंपिक में अपने प्रदर्शन से देश के लिए राष्ट्रीय खेल हाकी में ब्रांज मैडल जीतने वाली टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे ओलंपियन खिलाड़ी विवेक सागर भी जिले के एक छोटे से गांव चांदौन से ओलंपिक तक पहुंचे हैं। अन्य खेल प्रतिभाओं ने भी एशियाड में नौकायन में गोल्ड मैडल जीतने वाली हर्षिता तोमर, शूटिंग में सिल्वर मैडल जीतने वाली प्रीति रजक और साफ्टबाल टेनिस एशियाड खिलाड़ी आध्या तिवारी भी नर्मदापुरम जिले को गौरान्वित करती हैं।

नर्मदापुरम के अपने अल्प कार्यकाल में मैंने सजगता, सक्रियता, समन्वयन, सहयोग और संवाद के सभी सूत्र सार्थक होते देखे हैं। प्रशासन और नागरिकों का परस्पर विश्वास आजादी के अमृतकाल में एक संतुलित अनुशासन को कैसे स्वयं साध लेता है यह अनुभव भी मेरे प्रशासनिक सेवा पथ का एक बड़ा हासिल है। हमारी आजादी अमृत महोत्सव के आनंद को पूर्ण कर अब नए आयाम रचने आगे चल पड़ी है और इक्कीसवीं सदी के आकाश पर हमारा विश्व विजयी तिरंगा ध्वज स्वतंत्रता का सम्पूर्ण सौंदर्य लेकर पूरे गौरव के साथ अखंड मंगल रच रहा है तो आइए हम भी स्वतंत्रता दिवस को युवा चेतना का भारत पर्व बनाएं ताकि एक युवा राष्ट्र कह सके कि स्वतंत्रता केवल अधिकार नहीं है बल्कि यह हमारी चेतना भी है। वह चेतना जो भारत संपूर्ण विश्व को सौंपेगा संपूर्ण सौंदर्य के साथ, संपूर्ण सर्व समर्पित नव दृष्टि के साथ और भारतीयता के अमृत स्वर के साथ।

सभी नागरिकों को आजादी के महापर्व की अशेष शुभकामनाएं!

सोनिया मीना, आईएएस
कलेक्टर, नर्मदापुरम

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