
आज के बौद्धिक युद्ध (Narrative War) में देश का युवा ही है ‘शिवाजी’, शिक्षा और नवाचार है उनकी ‘भवानी तलवार’ – कुणाल,टाइगर वाहिनी ने निकाली भव्य शौर्य यात्रा; जातिवाद मिटाकर हिंदू एकता का दिया संदेश.
इटारसी// मनीष जायसवाल
जातिवाद को जड़ से मिटाने और हिंदू समाज में एकजुटता लाने के संकल्प के साथ कार्यरत संगठन ‘टाइगर वाहिनी’ द्वारा आज छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर नगर में एक भव्य शोभा यात्रा का आयोजन किया गया। यह यात्रा न केवल उत्सव का प्रतीक रही, बल्कि सामाजिक समरसता का एक बड़ा केंद्र भी बनी।
खेड़ापति मंदिर से जयस्तंभ तक भगवामय हुआ नगर
शोभा यात्रा का शुभारंभ पुरानी इटारसी स्थित खेड़ापति मंदिर से विधि-विधान के साथ हुआ। यहाँ से प्रारंभ होकर यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरी, जहाँ स्थानीय निवासियों ने पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया। यात्रा का समापन शहर के हृदय स्थल जयस्तंभ पर एक विशाल आम सभा के रूप में हुआ।
प्रमुख वक्ताओं के विचार
कुणाल सराठे (प्रांत कार्यसमिति सदस्य, ABVP):
समापन अवसर पर खुले मंच से संबोधित करते हुए कुणाल सराठे ने कहा:
”छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक राजा नहीं, बल्कि एक विचार हैं जिन्होंने ‘हिंदवी स्वराज्य’ की स्थापना कर हमें स्वाभिमान से जीना सिखाया। आज के युवाओं को उनके पदचिह्नों पर चलते हुए संकीर्ण मानसिकता और जातिगत भेदों से ऊपर उठना होगा। आज के युद्ध के मैदान बदल गए हैं। आज आक्रमण सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, हमारे विचार और समाज की एकता पर हो रहे हैं। इस आधुनिक ‘नैरेटिव वॉर’ में आज के शिवाजी हमारे युवा हैं, जिनकी शिक्षा, अनुशासन और नवाचार ही उनका ‘भवानी तलवार’ है।”
शिवम सेजकर (संस्थापक, टाइगर वाहिनी):
संगठन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए संस्थापक शिवम सेजकर ने बताया:
”टाइगर वाहिनी का जन्म ही समाज में फैली जातिवाद की कुरीति को समाप्त करने के लिए हुआ है। हमारा उद्देश्य स्पष्ट है—एक ऐसा हिंदू समाज जहाँ ऊंच-नीच का कोई स्थान न हो। आज की यह शोभा यात्रा इटारसी की धरती पर इसी एकता का शंखनाद है। हम आने वाले समय में हर युवा को इस मुहिम से जोड़कर एक अखंड और समरस समाज का निर्माण करेंगे।”
एकता का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमूह ने जातिवाद त्यागने और राष्ट्रहित में संगठित रहने की शपथ ली। इस दौरान बड़ी संख्या में टाइगर वाहिनी के कार्यकर्ता, मातृशक्ति और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।









