
एकलव्य इंटरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों ने प्राचीन भारतीय संस्कृति को किया पुनः जीवंत.
इटारसी// मनीष जायसवाल
विद्यार्थियों ने प्राचीन काल में हुए इस रहस्य को खुद जाना की 13 वी सदी में कागज के छापेखाने के निर्माण के पूर्व लोग, किस प्रकार हिमालय पर्वत पर लगे भोजपत्र,ताड़पत्र आदि के वृक्षों के पत्र को सुखाकर,लेप आदि लगाकर तैयार कर पेन के स्थान पर पक्षियों के पंखों,सुखी लकड़ियों आदि से,स्याही की जगह प्राकृतिक रंगों से,कुमकुम,अष्टगंध या रक्त चंदन को पानी में घोलकर हाथ से लिखा करते थे जो दस्तावेज पांडुलिपियां कहलाती हैं कभी तो रक्त आदि से भी लिखा करते.इस प्रकार इटारसी शहर में पहली बार हमारे बच्चों ने स्वयं इसे लिखकर जाना कि किस प्रकार उस समय के ऋषि मुनियों,लोगों ने संस्कृत साहित्य और इतिहास आदि की प्राचीन से प्राचीन जानकारी को हम तक पहुंचाया । आश्चर्य है आज के समय में बच्चों ने उस लेखन संस्कृति को शाला द्वारा सीखकर उसे जीवंत कर दिया।









