
कलचुरी कलार समाज के आराध्य भगवान सहस्त्रबाहु का जयंती पर्व कल 19 नवंबर को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा.
इटारसी// मनीष जायसवाल
कलचुरी कलार समाज के आराध्य देवता भगवान सहस्त्रबाहु जी का जयंती पर्व हर वर्ष हर्षोल्लास के साथ कलचुरी कलार समाज इटारसी द्वारा मनाया जाता है साथ ही पूरे जिले में यह जयंती पर्व सामाजिक सदस्यों द्वारा मनाया जाता है जिसमें समाज के कलचुरी युवा मंडल,वरिष्ठ मंडल सदस्य गण,महिला मंडल सभी की सहभागिता के साथ इटारसी एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से सभी सामाजिक बंधु इस कार्यक्रम में शामिल होते हैं एवं भगवान सहस्त्रबाहु के जयंती पर्व में अपनी सहभागिता निभाते हैं इस वर्ष सहस्त्रबाहु जयंती पर्व के उपलक्ष में आयोजन 16 नवंबर से प्रारंभ हुए जिसमें प्रथम दिवस बच्चों की प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें समाज के बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया एवं आज 18 नवंबर को समाज की महिलाओं हेतु विभिन्न प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें रंगोली एवं मेहंदी प्रतियोगिता आदि शामिल है जिसमें सभी सामाजिक युवतियां एवं महिला सदस्य ने उत्साह पूर्वक भाग लिया

भगवान सहस्त्रबाहु जयंती का मुख्य आयोजन
भगवान सहस्त्रबाहु जयंती का मुख्य आयोजन कल 19 नवंबर दिन रविवार को कलचुरी समाज के आराध्य देवता भगवान सहस्त्रबाहु की आरती एवं पूजन के साथ सायंकाल 6:00 बजे कलचुरी मार्ग स्थित कलचुरी कलार समाज भवन (संत रैदास नगर) मे आयोजित किया जाएगा.इसके पूर्व भगवान सहस्त्रबाहु की शोभा यात्रा दोपहर 3:00 बजे से प्रारंभ की जाएगी जिसमें सभी सामाजिक बंधु,माताएं बहने एवं बच्चे शामिल होंगे शोभा यात्रा प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी कलचुरी भवन से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गो से होती हुई वापस कलचुरी भवन पहुंचेगी. मुख्य कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठ जनों,कार्यकारिणी सदस्यों,आमंत्रित अतिथि गण एवं वक्ताओं का उद्बोधन,पुरस्कार वितरण एवं भोजन प्रसादी का कार्यक्रम रहेगा जो कि प्रतिवर्ष होता है

कलचुरी कलार समाज के आराध्य देवता भगवान सहस्त्रबाहु भगवान …….
भगवान सहस्त्रबाहु जी का प्रगट उत्सव कार्तिक शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मनाया जाता है। सहस्रार्जुन जी की कथाएं, महाभारत एवं वेदों के साथ सभी पुराणों में प्राय: पाई जाती हैं। चंद्रवंशी क्षत्रियों में सर्वश्रेठ हैहयवंश एक उच्च कुल के क्षत्रिय हैं। महाराज कार्तवीर्य अर्जुन (सहस्रार्जुन) जी का जन्म कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को श्रावण नक्षत्र में प्रात: काल के मुहूर्त में हुआ था। वह भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के द्वारा जन्म कथा का वर्णन भागवत पुराण में लिखा है। अत: सभी अवतारों के भांति वह भी भगवान विष्णु के चौबीसवें अवतार माने गए हैं, इनके नाम से भी पुराण संग्रह में सहस्रार्जुन पुराण के तीन भाग हैं।







