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हाई कोर्ट ने किया मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत का आदेश निरस्त,धर्मेंद्र चौहान पंचायत सचिव बहाल.

जबलपुर//इटारसी

//जिला नर्मदापुरम

//हाई कोर्ट ने किया मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत का आदेश निरस्त.

//धर्मेंद्र चौहान पंचायत सचिव बहाल.

//मतदान जागरूकता अभियान में रुचि न लेने के आरोप में हुआ था टर्मिनेशन.

//सिंचाई परियोजना पूरी नहीं होनी के कारण ग्रामीणों ने किया था लोकसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार.

//हाई कोर्ट ने किया मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत का आदेश निरस्त.

//धर्मेंद्र चौहान पंचायत सचिव बहाल.

//मतदान जागरूकता अभियान में रुचि न लेने के आरोप में हुआ था टर्मिनेशन.

//सिंचाई परियोजना पूरी नहीं होनी के कारण ग्रामीणों ने किया था लोकसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति माननीय विवेक जैन ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत के उस आदेश को निरस्त कर दिया है जिसमें ग्राम पंचायत भरूद के सचिव धर्मेंद्र सिंह चौहान को मतदान जागरूकता अभियान में रुचि न लेने एवं अन्य बे बुनियाद आधारों पर टर्मिनेट कर दिया गया था.

उक्त आशय की जानकारी ऐश्वर्य पार्थ साहू एडवोकेट ने जबलपुर से दी। श्री साहू ने बताया कि उद्ववहन सिंचाई योजना पूरी न होने के कारण ग्रामीणों द्वारा लोकसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार किया था. लोकसभा चुनाव में धर्मेंद्र चौहान चुनाव ड्यूटी के बाबजूद मतदान किया और उनके परिवार ने भी ग्राम खालदा खेड़ी में मतदान किया था फिर भी बेबुनियाद आरोपो के आधार पर उन्हें 14 मई 24 को निलंबित कर दिया गया और चार्ज से दे दी गई थी। 15 मई को जवाब दिया गया जिसे अनदेखा कर 22 मई को रिपोर्ट प्रस्तुत हुई और उसी दिन उन्हें मुख्य कार्यपालक अधिकारी जिला पंचायत खंडवा द्वारा टर्मिनेट कर दिया गया ।श्री साहू ने बताया कि टर्मिनेशन के खिलाफ पंचायत रूल के तहत पीड़ित धर्मेंद्र चौहान पंचायत सचिव को कोई नोटिस नहीं दिया गया, जिस दिन इंक्वारी रिपोर्ट जमा हुई और उसी दिन टर्मिनेशन (Termination) कर दिया गया जो विधि विरुद्ध था उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति विवेक जैन ने अधिवक्ता ऐश्वर्य पार्थ साहू की दलीलों,प्रस्तुत पंचायत कानून की धाराओं के साथ साथ न्याय व्यवस्था की मंशा से सहमत होते हुए धर्मेंद्र चौहान पंचायत सचिव के खिलाफ जारी टर्मिनेशन ऑर्डर को निरस्त कर दिया है ये समाचार इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि इसमें न्यायालय ने शासन को नोटिस दिए बिना उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर प्रथम विधि सम्मत सुनवाई में प्रकरण का निराकरण कर विधि विरुद्ध टर्मिनेशन को समाप्त कर दिया है। शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता श्री ललित जोगलिकर उपस्थित हुए .

 

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