
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की भाषाओं की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोने का नाम हिंदी है: नेहरू युवा केंद्र.
♦नर्मदापुरम//मनीष जायसवाल
नेहरू युवा केंद्र नर्मदापुरम द्वारा हिंदी पखवाड़ा मनाया जा रहा है इस अवसर पर जिला केंद्र से जानकारी देते हुए साहिल तिलोटिया ने हिंदी भाषा के महत्व को समझाया एवं कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की भाषाओं की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोने का नाम हिंदी है । स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिंदी के महत्व को देखते हुए संविधान निर्माताओं ने 14 सिंतबर 1949 के दिन हिंदी को देश की राष्ट्रभाषा के तौर पर स्वीकार किया था। वही विद्या अकैडमी के संचालक सुभाष पलिया ने कहा कि देश की मौलिक और सृजनात्मक अभिव्यक्ति को सही मायनों में अपनी में ही की जा सकती है। वही कार्यक्रम में ब्राइट एजुकेशन डेवलपमेंट फाउंडेशन के प्रतिनिधि आयुष नहरिया ने कहा कि हिंदी भाषा ने देश की स्वतंत्रता के दौरान देशवासियों को एक सूत्र में बांधने और अनेक भाषाओं में बटे देश में एकता की भावना को स्थापित करने का भी काम किया है । वही विद्या अकैडमी में निबंध प्रतियोगिता भी कराई गई सभी प्रतिभागी को नेहरू युवा केंद्र द्वारा सर्टिफिकेट प्रदान वही कार्यक्रम में सचिन सैनी, प्रकाश चंद्र यादव, विकाश बाथरी, रचित तिलोटिया, निखिल पाल, आशु पाटनकर, प्रशांत मेहरा अन्य स्वयंसेवक उपस्थित रहे।






